Sunday, February 5, 2017

लाठी के गुण

लाठी में हैं गुण बहुत, सदा राखिये संग,
गहरि नदी, नाली जहाँ, तहाँ बचावै अंग,
तहाँ बचावै अंग, झपटि कुत्ता कहँ मारे,
दुश्मन दावागीर होय, तिनहूँ को झारै,
कह गिरिधर कविराय, सुनो हे दूर के बाठी,
सब हथियार छाँडि, हाथ महँ लीजै लाठी।

By :- गिरिधर कविराय

अनपढ़ मंत्री

कैसे कोई कहि सकै बड़े- बड़ेन की भूल,
संसद माँ उई पहुँचिगे जी न गये स्कूल,
जी न गये स्कूल तबो  बनि  बैढ़े मंत्री,
मिलि गयी उनको कार साथ मा दुई -दुई संत्री,
कहते जी. डी. सिंह देश मा अब का होई,
बड़े -बड़ेन की बात कहये अब  कैसे कोई।

By :- जी. डी. सिंह

धैर्य

तुम उतना आगे बढ़ो जितनी शक्ती होय,
बहकावे मा आइ कै दिह्यो न धीरज खोय,
दिह्यो न धीरज खोय चाल तुम अपनी चलना,
किह्यो सदा उपकार पैर पीछे नहि धरना,
कहते जी.डी.सिंह खर्च हो चाहे जितना,
मन मा लीन्हो ठानि काम तुम कीन्हो उतना।

By :- जी. डी. सिंह

बुरे की संगत

जाकी न धरती हरी ताहि न लीजै संग,
जो संग राखे ही बनै तौ करि राखु अपंग,
तौ करि राखु अपंग संग कबहूँ नहि लीजै,
सौ सौगंधै खाय चित्त मा याक न दीजै,
कह गिरधर कविराय खुटुक जइ है नहि ताकी,
कोटि दिलासा देय हरी घन धरती जाकी।

By :- गिरधर कविराय

सच्चे और बुरे की परख

रहिये लटपट काटि दिन अरु घामे मा सोय,
छांह नवाकी बैठिये जो तरु पतरो  होय,
जो तरु पतरो होय  एक दिन धोखा दइहै,
जा दिन चलै बयारि उलटि वह जर ते जइहै,
कह गिरधर कविराय छांह मोटे की गहिये,
पत्ता सब झारि जाय तबौ छाया मा रहिये।

By :- गिरधर कविराय



                                                            

Friday, February 3, 2017

गुटका

वाह चौधरी वार्डर हंटर पान पराग,
केसर मधु कुमार अरु शपथ संग दिलबाग,
शपथ संग दिलबाग वर्ड कप लेहु निहारी,
सरमावा डाइमंड सचिन से जो रूचि कारी,
कहते जी. डी.सिंह हरि ओइम अरु बोले शहंशाह,
तुलसी गुटका लखत ही मुख सेनि निकला वाह।

By :- जी. डी. सिंह


मधुर वचन

मधुर वचन तुम बोलि कै सब का लेहु रिझाय,
कटुक वचन ते आपकी इज्जत जाय न साय,
इज्जत जाय न साय वचन कडुवे मत कहना,
सब से राखो प्रेम साथ सब ही की रहना,
कहते जी. डी.सिंह बात सब पूरी करना,
भरौ  दलित को अंक बोलि कै मधुरे वचना।

By :- जी. डी. सिंह

बेटियों का ब्याह

बाबूजी है दइ रहे सब का याक सलाह,
बीस बरस के बाद ही बिटिया क करना ब्याह,
बिटिया करना ब्याह तभी वह सुख से रहि है,
रहै सभी दुःख दूरि काम सब सुन्दर होइ है,
कहते जी. डी.सिंह देह पर रखना काबू,
मानो  इनकी बात बतावें जैसी बाबु।

By :- जी. डी. सिंह

  

दिनचर्या


घर बाहर का साफ कै ताजा जलु भरि लाव,
हाथ धोय मुँह साफ कै तव तुम जाय नहाव,
तव तुम जाय नहाव बदन मा फुर्ती लाओ,
दूध दही के साथ हरी सब्जी भी  खाओ,
कहते जी.डी.सिंह काम सब करना मिल कर,
चाहे घर मा रहौ चाहे रहौ घर के बाहर।
 

By :- जी. डी. सिंह

छोटे लरिका

छोटे लरिकन के सुनो टीका लेहु लगवाय,
पर्स पोलियो आदि का सब खतरा मिटि जाय,
सब खतरा मिटि जाय नमक आयोडीन खाओ,
गर्भवती महिलन की जाकर जाँच कराओ,
कहते जी. डी.सिह पड़ै चाहे जितनी अरचन,
रह्यो सदा तैयार ध्यान रखो छोटे लरिकन।

By :- जी. डी. सिंह



राजनीतिक कुर्सी का लालच


हमका कुर्सी चाहिए ऊँचि होय चाहे नीचि,
जउनी विधि ते यह मिलै लावहु वहि का खीचि,
लावहु वहि का खीचि बैठी हम वहि पर पाई,
जउन मिलै अनुदान चाटि हम वहि का जाई,
कहते जी. डी.सिंह मोर मन तबहें हुलसी,
जनता भार मा जाय चाहिए हम का कुर्सी।

By :- जी. डी. सिंह

ग्राम प्रधान


परधानी के  मिलत ही पहिल कामु हम कीन,
कोटा शक्कर तेल का भेजि टड़ैचै दीन,
भेजि टड़ैचै दीन बादि मा महल बनायेन,
लीन्हेन भूमि खरीद अउर ट्रैक्टर लइ आयन,
कहते जी. डी. सिंह कीन्ह कसिकै मनमानी,
हस्ती लीन बनाय मिली जब से परधानी।

By :- जी. डी. सिंह

कलयुग की नवदुर्गा

नवदुर्गा पैदा भई कलजुग के दरम्यान,
ललिता-माया-रावड़ी- ममता-उमा-बखान,
ममता उमा बखान साथ मा शीला-सोनिया,
फूलन अउर स्वराज जानि गइ जिन को दुनिया,
कहते जी.डी.सिंह चाहिए इनको मुरगा,
कलयुग माँ भइ प्रकट हाय ऐसी नवदुर्गा ।

By :- जी. डी. सिंह

    

नेताओं का राज

कुरता पैजामा पहिर बनिगे नेता आज,
दूसरेन की सम्पत्ति पर झपटै जैसे बाज,
झपटै जैसे बाज नोचि नंगा कइ डारै,
वहिका डारै चूसि साथ मा शेखी झारै,
कहते जी.डी.सिंह गाँठि मा एकु न दामा,
लेकिन उनका झलकि रहा कुरता पैजामा ।

By :- जी. डी. सिंह


Saturday, January 28, 2017

पान मसाला

जो तुम्हरे लागै तलब हमका लह्यो पुकार,
हमते जो परहेज हो तो लेलो श्याम बहार,
लेलो श्याम बहार आपकी पावर लाना,
रजनी गंधा हरसिंगार अरु लीडर खाना,
कहते जी.डी सिंह चलौ राजा दरबारे,
है संजोगकि बात राज श्री साथ तुम्हरे ।

By :- जी. डी. सिंह

पानी के गुन

पानी मा गुन बहुत है बसै तुम्हरे अंग,
कहूं शांति है बैठि है कहूं दिखावै रंग,
कहूं दिखावै रंग कहीं पर पानी भरना,
कहीं पर जाये उतर कहीं पर पानी चढ़ना,
कहते जी. डी. सिंह इहै महिमा लासानी,
जो तुम इज्जत चाहौ आँखि मा राखो पानी ।


By :- जी. डी. सिंह

समय का महत्व

केतनी वर का होति है जान न पावा कोय,
सब जन यह कहतै फिरै होनी होय सो होय,
होनी होय सो होय कहबु यह सत्य तुम्हरा,
पर कर्तव्य क ध्यान रख्यो जो सब से न्यारा,
कहते जी.डी .सिंह काम मा रहेना चरफर,
न जानी यह मौत आइ जाये केतने वर।

By :- जी. डी. सिंह

कलयुग

भइया ई संसार माँ अपना सगा न कोय,
जिन पर तुम फूलति फिरौ दगा करै गे सोय,
दगा करेंगे सोय बाधि तुम का लइ जइ है,
देहिं आगि माँ फूकि रहम तनकौ ना लइ है,
कहते जी.डी.सिंह भजौ सब अम्बे मइया,
होइ जाव भव से पार बिना नइया के मइया ।  

By :- जी. डी. सिंह   

नीच की नीचता


नीच न छोड़ै नीचता केतनउ करौ उपाय,
दूध पिलाओ सांप का विष ही बढ़ता जाय,
विष ही बढ़ता जाय चले वह एकदम उल्टा,
जैसे घर का नासि करै वह नारी कुल्टा,
कहते जी. डी.  सिंह उधर से लेना आँखे मीच,
घर बाहर अरु राह माँ जो मिल जाय नीच।

By :- जी. डी. सिंह

  

नेता

कहलावै नेता वही मिथ्या करै प्रचार,
बदले रंग गिरगिट तरह दिन मा सौ-सौ बार,
दिन मा सौ-सौ बार आवादा सब से करते,
पड़ जाये यदि काम नहीं वह ढूढे मिलते,
कहते जी.डी.सिंह जौनु सब का भरमावे,
जेहिं मा ई गुन होय वहै  नेता कहलावे ।

By :- जी. डी. सिंह