Friday, February 3, 2017

गुटका

वाह चौधरी वार्डर हंटर पान पराग,
केसर मधु कुमार अरु शपथ संग दिलबाग,
शपथ संग दिलबाग वर्ड कप लेहु निहारी,
सरमावा डाइमंड सचिन से जो रूचि कारी,
कहते जी. डी.सिंह हरि ओइम अरु बोले शहंशाह,
तुलसी गुटका लखत ही मुख सेनि निकला वाह।

By :- जी. डी. सिंह


विजय दशमी

कहलायो जन मातु ने गमन कीन वन राम,
सिया हरण कइ लइ गयो रावण अपने धाम,
रावण अपने धाम पाई  सुधि कीन चढ़ाई,
मच्यो घोर संग्राम लंक मा धूरि उड़ाई,
कहते जी. डी.सिंह मारि जब रावण पायो,
क्वार मास शुभ दिवश विजय दशमी कहलायो।


By :- जी. डी. सिंह

मधुर वचन

मधुर वचन तुम बोलि कै सब का लेहु रिझाय,
कटुक वचन ते आपकी इज्जत जाय न साय,
इज्जत जाय न साय वचन कडुवे मत कहना,
सब से राखो प्रेम साथ सब ही की रहना,
कहते जी. डी.सिंह बात सब पूरी करना,
भरौ  दलित को अंक बोलि कै मधुरे वचना।

By :- जी. डी. सिंह

बेटियों का ब्याह

बाबूजी है दइ रहे सब का याक सलाह,
बीस बरस के बाद ही बिटिया क करना ब्याह,
बिटिया करना ब्याह तभी वह सुख से रहि है,
रहै सभी दुःख दूरि काम सब सुन्दर होइ है,
कहते जी. डी.सिंह देह पर रखना काबू,
मानो  इनकी बात बतावें जैसी बाबु।

By :- जी. डी. सिंह

  

दिनचर्या


घर बाहर का साफ कै ताजा जलु भरि लाव,
हाथ धोय मुँह साफ कै तव तुम जाय नहाव,
तव तुम जाय नहाव बदन मा फुर्ती लाओ,
दूध दही के साथ हरी सब्जी भी  खाओ,
कहते जी.डी.सिंह काम सब करना मिल कर,
चाहे घर मा रहौ चाहे रहौ घर के बाहर।
 

By :- जी. डी. सिंह

छोटे लरिका

छोटे लरिकन के सुनो टीका लेहु लगवाय,
पर्स पोलियो आदि का सब खतरा मिटि जाय,
सब खतरा मिटि जाय नमक आयोडीन खाओ,
गर्भवती महिलन की जाकर जाँच कराओ,
कहते जी. डी.सिह पड़ै चाहे जितनी अरचन,
रह्यो सदा तैयार ध्यान रखो छोटे लरिकन।

By :- जी. डी. सिंह



राजनीतिक कुर्सी का लालच


हमका कुर्सी चाहिए ऊँचि होय चाहे नीचि,
जउनी विधि ते यह मिलै लावहु वहि का खीचि,
लावहु वहि का खीचि बैठी हम वहि पर पाई,
जउन मिलै अनुदान चाटि हम वहि का जाई,
कहते जी. डी.सिंह मोर मन तबहें हुलसी,
जनता भार मा जाय चाहिए हम का कुर्सी।

By :- जी. डी. सिंह

ग्राम प्रधान


परधानी के  मिलत ही पहिल कामु हम कीन,
कोटा शक्कर तेल का भेजि टड़ैचै दीन,
भेजि टड़ैचै दीन बादि मा महल बनायेन,
लीन्हेन भूमि खरीद अउर ट्रैक्टर लइ आयन,
कहते जी. डी. सिंह कीन्ह कसिकै मनमानी,
हस्ती लीन बनाय मिली जब से परधानी।

By :- जी. डी. सिंह

कलयुग की नवदुर्गा

नवदुर्गा पैदा भई कलजुग के दरम्यान,
ललिता-माया-रावड़ी- ममता-उमा-बखान,
ममता उमा बखान साथ मा शीला-सोनिया,
फूलन अउर स्वराज जानि गइ जिन को दुनिया,
कहते जी.डी.सिंह चाहिए इनको मुरगा,
कलयुग माँ भइ प्रकट हाय ऐसी नवदुर्गा ।

By :- जी. डी. सिंह

    

नेताओं का राज

कुरता पैजामा पहिर बनिगे नेता आज,
दूसरेन की सम्पत्ति पर झपटै जैसे बाज,
झपटै जैसे बाज नोचि नंगा कइ डारै,
वहिका डारै चूसि साथ मा शेखी झारै,
कहते जी.डी.सिंह गाँठि मा एकु न दामा,
लेकिन उनका झलकि रहा कुरता पैजामा ।

By :- जी. डी. सिंह